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भिलाई स्क्रैप कांड: विधायक जी की ‘खोजी पत्रकारिता’ पर कुछ और सीधे सवाल?

अपनी ही सरकार पर नहीं भरोसा जो विधायक सेन लगा रहे गंभीर आरोप , केंद्र में किनकी थी सरकार थी विधायक सेन के प्रश्नों पर जनता की चर्चा का सवाल
सवाल नंबर 1: जब चोरी इतनी बड़ी थी, तो 2 साल 8 महीने से विधायक रहने के बाद ही यह ‘ज्ञान’ क्यों हुआ?
जवाब: विधायक जी सोशल मीडिया पर 40 साल पुरानी और 10 हजार करोड़ की चोरी का हिसाब दे रहे हैं। जनता पूछ रही है कि जब प्रदेश में 2 साल 8 महीने से आपकी अपनी सरकार है, तो आप खुद पुलिसिया कार्रवाई करवाने के बजाय फेसबुक पर पत्रकार बनकर ‘साख’ क्यों खोल रहे हैं? क्या यह अपनी ही सरकार की व्यवस्था पर भरोसा न होने का प्रमाण है या फिर सिर्फ लाइमलाइट में रहने का स्टंट?
सवाल नंबर 2: बाचू की गाड़ियों की जब्ती और 10 दिन के भीतर रिहाई—किस ‘ऊपरी हाथ’ का कमाल था?
जवाब: ट्रांसपोर्ट की आड़ में 80 टन चोरी का लोहा ले जाते हुए गाड़ियां पकड़ी गईं और फिर अचानक एक ‘रेंट एग्रीमेंट’ की जादुई एंट्री होती है और गाड़ियां छूट जाती हैं। सवाल यह है कि कबाड़ माफिया को बचाने के लिए यह बैक-डेट एग्रीमेंट तैयार करवाने में किस बड़े रसूखदार नेता का दिमाग और राजनीतिक दबाव काम कर रहा था?
सवाल नंबर 3: ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाली पार्टी में एक आदतन अपराधी कोषाध्यक्ष कैसे बना?
जवाब: जो व्यक्ति मजे-मजे में गोलियां चलाने के लिए बदनाम हो और जिसका नाम भिलाई-3 के इतने बड़े लोहा चोरी कांड में सरेआम आ रहा हो, वह रातों-रात सत्ताधारी दल का चहेता दुलरवा और ‘कोषाध्यक्ष’ जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर कैसे बैठ गया? क्या पार्टी के पास ईमानदार कार्यकर्ताओं का अकाल पड़ गया है या फिर ‘कमीशन की मिठाई’ का वजन ज्यादा भारी पड़ गया?
सवाल नंबर 4: थाना प्रभारी का ट्रांसफर जांच को दबाने के लिए हुआ या सच छुपाने के लिए?
जवाब: 250 टन से अधिक का लोहा पकड़ने वाले भिलाई-3 के थाना प्रभारी को इनाम मिलने के बजाय ‘रूटीन’ के नाम पर साइडलाइन कर दिया गया। यह रूटीन ट्रांसफर नहीं, बल्कि जांच की दिशा मोड़ने का साफ-साफ राजनीतिक दबाव था, ताकि कबाड़ कारोबारियों की कमान संभालने वाले सफेदपोश आकाओं तक पुलिस के हाथ न पहुंच सकें।
सवाल नंबर 5: 2021 से 2023 के बीच केंद्र में बैठे इस्पात मंत्रियों की भूमिका पर विधायक जी मौन क्यों हैं?
जवाब: विधायक जी जिस 110 करोड़ के टेंडर और डिस्मेंटल स्क्रैप की बात 2021-22 की कर रहे हैं, उस दौरान केंद्र में धर्मेंद्र प्रधान और रामचंद्र प्रसाद सिंह (आर.सी.पी. सिंह) जैसे कद्दावर नेता इस्पात मंत्री (Steel Minister) थे। अगर नियमों को ताक पर रखकर टेंडर फाइनल हुआ, तो क्या विधायक जी के निशाने पर उनकी अपनी ही पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के मंत्रियों और सेल (SAIL) के सीएमडी के हस्ताक्षर भी हैं?
सवाल नंबर 6: क्या यह पूरी बयानबाजी सिर्फ अपना ‘हिस्सा’ तय करने का दवाब है?
जवाब: भिलाई की जनता में अब यह चर्चा आम है कि विधायक जी को न तो लोहा चोरी रोकने में दिलचस्पी है और न ही अपराधियों को जेल भेजने में। यह पूरी सोशल मीडिया वॉर और तीखे आरोप सिर्फ इसलिए लगाए जा रहे हैं ताकि कबाड़ के इस अरबों रुपये के खेल में अपना ‘कमीशन’ और ‘हिस्सा’ तय किया जा सके।
सवाल नंबर 7: एक एकड़ से डिस्मेंटल के नाम पर 15 लाख टन लोहा चोरी होने का दावा कितना सच है?
जवाब: विधायक जी, थोड़ा गणित तो लगाइए! भिलाई 3 के पूरे पावर प्लांट में, जो 4 एकड़ में फैला है, कुल मिलाकर 2 लाख 50 हजार टन लोहा लगा है। जब पूरे 4 एकड़ का ढांचा ही ढाई लाख टन का है, तो आपके दावे के मुताबिक सिर्फ 1 एकड़ से 15 लाख टन लोहा कैसे चोरी हो सकता है? यह जनता को गुमराह करने और बात का बतंगड़ बनाने जैसा है।
सवाल नंबर 8: क्या बॉम्बे की जिस कंपनी को 110 करोड़ का टेंडर मिला था, उसे केंद्र से कोई सीधा ऑफर मिला था?
जवाब: बीएसपी (BSP) अपने कबाड़ का टेंडर पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से निकालती है। देश भर की कंपनियां इस ऑक्शन (नीलामी) में शामिल होती हैं और अपने रेट मेजरमेंट के हिसाब से तय करती हैं। इसके बाद जो कंपनी सबसे ज्यादा आर्थिक लाभ देने वाली होती है, टेंडर उसी को मिलता है। इसमें किसी को ‘पर्सनल ऑफर’ देने का कोई प्रावधान ही नहीं होता।
सवाल नंबर 9: विधायक सेन ने 2021-22 में जिस 110 करोड़ के टेंडर घोटाले की बात कही, उसका असली सच क्या है?
जवाब: इतने बड़े टेंडर को सीधे सेल (SAIL) के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) और केंद्रीय इस्पात मंत्रालय (Ministry of Steel) ही फाइनल करते हैं। नियम बनाने से लेकर फाइनल मंजूरी तक तत्कालीन इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (और बाद में रामचंद्र प्रसाद सिंह) सहित बड़े अधिकारियों के हस्ताक्षर होते हैं। तो क्या विधायक जी यह कहना चाहते हैं कि भाजपा की केंद्र सरकार और एनडीए के बड़े नेता भी इस कथित घोटाले में संलिप्त हैं?
सवाल नंबर 10: भिलाई 3 में रेड पड़ने और भास्कर मुदलियार ‘बाचू’ का नाम आने के बाद ही आप अचानक जनता के सामने क्यों मुखर हुए?
जवाब: शहर में चर्चा गरम है कि भास्कर मुदलियार बाचू ट्रांसपोर्ट की आड़ में कबाड़ का धंधा करता था। भिलाई 3 में ‘A K TRADERS’ पर पड़ी रेड में भास्कर की गाड़ी में लगभग 80 टन चोरी का लोहा लोड पाया गया। गाड़ियां जब्त हुईं, लेकिन 10 दिन बाद एक ‘रेंट एग्रीमेंट’ पेश करके गाड़ियां छुड़वा ली गईं। सवाल यह है कि क्या खुद को बचाने और चोरों से लोहा खरीदने की बात छुपाने के लिए यह बैक-डेट एग्रीमेंट तैयार करवाया गया?
सवाल नंबर 11: विधायक जी, आपका हर आरोप आपकी ही सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के इर्द-गिर्द क्यों घूम रहा है?
जवाब: आपका आरोप है कि पुलिस और नेताओं ने मिलकर यह संगठित चोरी की है। लेकिन गौर करने वाली बात है कि 2021 से लेकर अब तक केंद्र के इस्पात मंत्री भाजपा के ही रहे हैं। तो क्या आपकी नजर में आपकी ही पार्टी के सांसद, विधायक और मुख्यमंत्री भी इस जांच के घेरे में आते हैं? आप उंगली उठा किस पर रहे हैं?
सवाल नंबर 12: भिलाई 3 में पकड़ाए लोहे के बाद, वहां के थाना प्रभारी का ‘रूटीन’ के नाम पर ट्रांसफर क्यों किया गया?
जवाब: बीएसपी प्लांट का 250 टन से अधिक का चोरी का लोहा पकड़े जाने के बाद जांच की दिशा बदलने का खेल शुरू हुआ। कबाड़ माफियाओं और सफेदपोशों के राजनीतिक दबाव में, ईमानदार थाना प्रभारी को ‘रूटीन चेकिंग’ का बहाना बनाकर दूसरे थाने भेज दिया गया, ताकि जांच सुस्त हो सके और बड़े नाम बच सकें।
सार: मामला साफ है—चोरी बीएसपी प्लांट की हो रही है, गाड़ियां सत्ता पक्ष के करीबी की पकड़ा रही हैं, ट्रांसफर ईमानदार अफसरों का हो रहा है, और विधायक जी खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए हवा में तीर चला रहे हैं। आखिर इस संगठित अपराध का असली ‘बॉस’ कौन है? शोसल मीडिया की तीखी कंट्रोवर्सी के बाद अब विधायक जी से जनता सीधा सवाल कर रही है….





